द्रोणकाल की वापसी द्रोणकाल को समझिए -सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर के लिए कंपटीशन तो होना था एकलव्य और कर्ण के बीच। लेकिन एकलव्य का अंगूठा कटवाकर उसे कंपटीशन लायक रहने नहीं दिया और अंतिम कंपटीशन में जब कर्ण ने एंट्री मार दी तो उसे डिस्क्वालीफाई कर दिया। इस तरह से थर्ड नंबरी अर्जुन को विजेता घोषित किया गया। अर्जुन से श्रेष्ठ कुछ और भी धनुर्धर हो सकते थे पर उनको तो कतई एक्सपोजर नहीं मिला वरना अर्जुन का नंबर चौथा, पांचवां, या और भी नीचे हो सकता था।
- अब द्रोणकाल और भी वीभत्स रूप में वापसी कर चुका है। तकरीबन हर वैकेंसी में ओबीसी एससी एसटी की सीटें कम रखी जाती हैं, फिर क्वेश्चन पेपरलीक करना, उत्तर पुस्तिकाएं चेक करने में हेराफेरी जैसे षड्यंत्र होते हैं। इसके बाद इंटरव्यू में खेला होता है। पूरी कोशिश होती है कि अपना प्रिय पात्र अर्जुन को टॉप कराया जाए।
- ये द्रोणकाल पहले से चला आ रहा है लेकिन भाजपा ने जिस तरह से इसको पुरजोर समर्थन दिया है, वह उसकी सफलता का असली कारण है। इस नीति में उसे कोई पीछे छोड़ ही नहीं सकता है।
- अब भाजपा से आगे निकलने का एकमात्र तरीका द्रोणकाल का मौन या मुखर समर्थन नहीं, इसका कड़ा और मुखर विरोध ही हो सकता है।
- अगर ईस द्रोणकाल को रोकना है तो उसके लिए सबसे पहले हमें आगे आना होंगा।
- देेेश की 85% जनता SC,ST,OBC समाज से है तो क्या हम सब एक जुट हॉ कर ईस सरकार को बदल नहीं सकते? बिल्कुल बदल सकते है..
- मूलनिवासी की ईस पोस्ट को कम से कम दस लोगो तक पहुचाईए आपका यह योगदान आने वाली पीढ़ी के लिए अमूल्य भेट होंगा अन्यथा फिर से हम गुलामी की कगार पर है।